Explore Html and more!

हजारीलाल ने कहा कि मेरी क्‍या मजाल कि मैं सुप्रीम कोर्ट की शान में गुस्‍ताखी करूं। मैं सरकारों के बेहूदा चाल-चलन के बारे में बतला रहा हूं क्‍योंकि उसे चलाने वाले दुष्‍कर्मी हैं। जो आधार कार्ड के बहाने गरीबों के खातों में सब्सिडी के नाम पर नकद ताकत जमा कर रहे हैं। मेरे खाते में भी 600 रुपए जमा मिले हैं ताकि मैं सीधे-सीधे अपने परिवार के पांच वोट उनके पक्ष में समर्पित कर दूं और उनकी सरकार की सुरक्षा सुनिश्चित हो

हजारीलाल ने कहा कि मेरी क्‍या मजाल कि मैं सुप्रीम कोर्ट की शान में गुस्‍ताखी करूं। मैं सरकारों के बेहूदा चाल-चलन के बारे में बतला रहा हूं क्‍योंकि उसे चलाने वाले दुष्‍कर्मी हैं। जो आधार कार्ड के बहाने गरीबों के खातों में सब्सिडी के नाम पर नकद ताकत जमा कर रहे हैं। मेरे खाते में भी 600 रुपए जमा मिले हैं ताकि मैं सीधे-सीधे अपने परिवार के पांच वोट उनके पक्ष में समर्पित कर दूं और उनकी सरकार की सुरक्षा सुनिश्चित हो

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/12/18-2012.html  नब्‍बे फीसदी भारतीय बेवकूफ हैं, न्‍यायमूर्ति काटजू के इस कथन का सकारात्‍मक पक्ष भीहै कि बेवकूफ बहुमत में हैं। लोकतंत्र ही बहुमत, बहुमत ही लोकतंत्र है, इसके मुकाबले न ठहरा कोई तंत्र है। मतलब लोकतंत्र में बहुमत की तूती बोलती है और पुंगी बजती है। सोचिए भला, सिर्फ दस प्रतिशत बु‍द्धिमान क्‍या घास छील लेंगे, कोशिश करेंगे भी तो थक जाएंगे। उनने माहिर चिकित्‍सक की भांति कहा है कि इनके दिमाग में भेजा नहीं होता। इससे यह भी लगता है कि

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/12/18-2012.html नब्‍बे फीसदी भारतीय बेवकूफ हैं, न्‍यायमूर्ति काटजू के इस कथन का सकारात्‍मक पक्ष भीहै कि बेवकूफ बहुमत में हैं। लोकतंत्र ही बहुमत, बहुमत ही लोकतंत्र है, इसके मुकाबले न ठहरा कोई तंत्र है। मतलब लोकतंत्र में बहुमत की तूती बोलती है और पुंगी बजती है। सोचिए भला, सिर्फ दस प्रतिशत बु‍द्धिमान क्‍या घास छील लेंगे, कोशिश करेंगे भी तो थक जाएंगे। उनने माहिर चिकित्‍सक की भांति कहा है कि इनके दिमाग में भेजा नहीं होता। इससे यह भी लगता है कि

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/12/4-2012.html  चारों की चौकड़ी आज स्‍पेशल सुविधाओं के तहत स्‍वर्ग में धूम मचा रही है। जबकि उन्‍होंने जिन कारनामों को अंजाम दिया था, उसके अनुसार उनकी नर्क में सजा पाने की ग्राह्यता बनती थी। ठाकरे भगवान के सैनिकों का गठन करके उनकी दबंगई के बल पर वहां मौजूद थे। कसाब को यमराज के कार्यों में हस्‍तक्षेप के चलते तुरंत बुलाया गया था, मच्‍छर ने यमराज के काम को आसान किया था विशेष भत्‍तों में इकानॉमी लाने के कारण और दारू किंग पोंटी चड्ढा को अपरोक्ष तौर…

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/12/4-2012.html चारों की चौकड़ी आज स्‍पेशल सुविधाओं के तहत स्‍वर्ग में धूम मचा रही है। जबकि उन्‍होंने जिन कारनामों को अंजाम दिया था, उसके अनुसार उनकी नर्क में सजा पाने की ग्राह्यता बनती थी। ठाकरे भगवान के सैनिकों का गठन करके उनकी दबंगई के बल पर वहां मौजूद थे। कसाब को यमराज के कार्यों में हस्‍तक्षेप के चलते तुरंत बुलाया गया था, मच्‍छर ने यमराज के काम को आसान किया था विशेष भत्‍तों में इकानॉमी लाने के कारण और दारू किंग पोंटी चड्ढा को अपरोक्ष तौर…

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/01/blog-post.html  दुष्‍कर्मी और मुन्‍नाभाई संवाद : जनवाणी दैनिक प्रथम जनवरी तेरह स्‍तंभ 'तीखी नजर' में प्रकाशित

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/01/blog-post.html दुष्‍कर्मी और मुन्‍नाभाई संवाद : जनवाणी दैनिक प्रथम जनवरी तेरह स्‍तंभ 'तीखी नजर' में प्रकाशित

http://www.nukkadh.com/2013/02/26-2013.html  पीएम पद की मिठाई खाने की लालसा : दैनिक जनवाणी 26 फरवरी 2013 स्‍तंभ 'तीखी नज़र' में प्रकाशित  पीएम का पद पकवान सरीखा है जबकि यह वह जलेबी नहीं है जो सीधी हो। सीधी जलेबियां राजनीति में तो मिलती नहीं हैं। सब खीर खाना चाहते हैं, एक साथ टूट भी पड़ते हैं पर जिस बरतन पर वे एक साथ भूखों की तरह लारातुर हैं, वह रसमलाई है। खीर पर एक चौकस बिल्‍ली की नजर है, वह उसे अपने जवान होते बच्‍चे को खिलाएगी। उसने सारे जोड़-तोड़ और जुगाड़ बिठा लिए हैं।

http://www.nukkadh.com/2013/02/26-2013.html पीएम पद की मिठाई खाने की लालसा : दैनिक जनवाणी 26 फरवरी 2013 स्‍तंभ 'तीखी नज़र' में प्रकाशित पीएम का पद पकवान सरीखा है जबकि यह वह जलेबी नहीं है जो सीधी हो। सीधी जलेबियां राजनीति में तो मिलती नहीं हैं। सब खीर खाना चाहते हैं, एक साथ टूट भी पड़ते हैं पर जिस बरतन पर वे एक साथ भूखों की तरह लारातुर हैं, वह रसमलाई है। खीर पर एक चौकस बिल्‍ली की नजर है, वह उसे अपने जवान होते बच्‍चे को खिलाएगी। उसने सारे जोड़-तोड़ और जुगाड़ बिठा लिए हैं।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/11/13-2012.html  मच्‍छर निरक्षर लिखे हुए को पढ़ना नहीं जानता किंतु कसाब को पहचानता है। जरूर किसी खुफिया विभाग में रहा होगा या किसी खुफिया अधिकारी को खुफिया तरीके से काटा होगा। कसाब को काटना उसने ओपनीय रखा है गोपनीय नहीं। पंखा चलाओ तो मच्‍छर भाग जाते हैं। मच्‍छर का मंडराना जब मन को दिखाई नहीं देगा। मच्‍छर गूंज गूंज कर, मंडरा मंडरा कर आम आदमी के मन को डराने में मशगूल है ओपनमैन के माफिक। यह मच्‍छर का प्रिय शगल है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/11/13-2012.html मच्‍छर निरक्षर लिखे हुए को पढ़ना नहीं जानता किंतु कसाब को पहचानता है। जरूर किसी खुफिया विभाग में रहा होगा या किसी खुफिया अधिकारी को खुफिया तरीके से काटा होगा। कसाब को काटना उसने ओपनीय रखा है गोपनीय नहीं। पंखा चलाओ तो मच्‍छर भाग जाते हैं। मच्‍छर का मंडराना जब मन को दिखाई नहीं देगा। मच्‍छर गूंज गूंज कर, मंडरा मंडरा कर आम आदमी के मन को डराने में मशगूल है ओपनमैन के माफिक। यह मच्‍छर का प्रिय शगल है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/11/20-2012_9193.html   हिंदी ब्‍लॉगरों, फेसबुक के गिरधारियों, ट्विटर उड़ाने वालों और सोशल मीडिया पर अभिव्‍यक्ति की आजादी का नारा बुलंद करने वालों,अब सावधान हो जाओ। कभी भी किसी का भी नाड़ा खोला जा सकता है और पायजामा सरकने पर कितनी थू-थू होती है, इतना तो तय है कि आप पायजामा सरकने से सेलीब्रिटी बनने से रहे। अपने नाड़े को किसी मॉडल के ब्रॉ का हुक मत समझ लेना जो रैम्‍प पर बेवफा हो गया तो उसका जीवंत प्रसारण हो रहा होगा। नाड़ा कब फांसी का फंदा बन…

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/11/20-2012_9193.html हिंदी ब्‍लॉगरों, फेसबुक के गिरधारियों, ट्विटर उड़ाने वालों और सोशल मीडिया पर अभिव्‍यक्ति की आजादी का नारा बुलंद करने वालों,अब सावधान हो जाओ। कभी भी किसी का भी नाड़ा खोला जा सकता है और पायजामा सरकने पर कितनी थू-थू होती है, इतना तो तय है कि आप पायजामा सरकने से सेलीब्रिटी बनने से रहे। अपने नाड़े को किसी मॉडल के ब्रॉ का हुक मत समझ लेना जो रैम्‍प पर बेवफा हो गया तो उसका जीवंत प्रसारण हो रहा होगा। नाड़ा कब फांसी का फंदा बन…

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/02/12-2013.html  फांसी का शून्‍यकाल टूट गया : दैनिक जनवाणी 12 फरवरी 2013 स्‍तंभ तीखी नजर में प्रकाशित  गलों को भय का ग्रहण लग गया है। गलों के बाहर रस्‍सी का डर इतना व्‍यापक असर डाल रहा है कि गले के भीतर खराश होनी लगी है और डर रिस रिस कर बाहर आ, सबको डरा रहा है।  मौत के भय को यूं ही हल्‍के में लेकर भला आज तक कोई खारिज कर सका है। उपनामों और नामों में निडर, निर्भय, निर्भीक, बहादुर जैसी उपमाओं को जोड़कर भी खौफ का आलम मिटाए नहीं मिट रहा है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/02/12-2013.html फांसी का शून्‍यकाल टूट गया : दैनिक जनवाणी 12 फरवरी 2013 स्‍तंभ तीखी नजर में प्रकाशित गलों को भय का ग्रहण लग गया है। गलों के बाहर रस्‍सी का डर इतना व्‍यापक असर डाल रहा है कि गले के भीतर खराश होनी लगी है और डर रिस रिस कर बाहर आ, सबको डरा रहा है। मौत के भय को यूं ही हल्‍के में लेकर भला आज तक कोई खारिज कर सका है। उपनामों और नामों में निडर, निर्भय, निर्भीक, बहादुर जैसी उपमाओं को जोड़कर भी खौफ का आलम मिटाए नहीं मिट रहा है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/09/18-2012.html  राग भिड़ासी से यूं तो सभी परिचित हैं किंतु मेट्रो शहरों में इसके मुक्‍तभोगियों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके गाने-बजाने के संबंध में कोई तय समय नहीं है। इसे कभी भी गाया-बजाया जा सकता है। इसका आयोजन स्‍थल आपके घर के सामने उस जगह पर होता है, जो आपकी न होते हुए भी आपकी मानी जाती है। यह सिलसिला रोजाना वहीं शुरू होता है। आपके और सामने तथा साथ  रहने वाले पड़ोसियों के घर के सामने होता है, तीसरे, चौथे, पांचवे के ...

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/09/18-2012.html राग भिड़ासी से यूं तो सभी परिचित हैं किंतु मेट्रो शहरों में इसके मुक्‍तभोगियों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके गाने-बजाने के संबंध में कोई तय समय नहीं है। इसे कभी भी गाया-बजाया जा सकता है। इसका आयोजन स्‍थल आपके घर के सामने उस जगह पर होता है, जो आपकी न होते हुए भी आपकी मानी जाती है। यह सिलसिला रोजाना वहीं शुरू होता है। आपके और सामने तथा साथ रहने वाले पड़ोसियों के घर के सामने होता है, तीसरे, चौथे, पांचवे के ...

रामजी की चिडि़या देश हमारा : दैनिक जनवाणी स्‍तंभ तीखी नज़र में 9 अप्रैल 2013 को प्रकाशित  http://avinash.nukkadh.com/2013/04/9-2013.html

रामजी की चिडि़या देश हमारा : दैनिक जनवाणी स्‍तंभ तीखी नज़र में 9 अप्रैल 2013 को प्रकाशित http://avinash.nukkadh.com/2013/04/9-2013.html

Pinterest
Search